

रिपोर्ट: अजय सक्सेना
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तारी और तलाशी की प्रक्रिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब पुलिस CBI और ED (इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट) की तर्ज पर काम करेगी। इसका मकसद निर्दोष लोगों को गलत फंसाने से बचाना, पुलिस की जवाबदेही तय करना और अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस बनाना है।
क्या हैं नए नियम?

1. गिरफ्तारी की विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य
- अब हर गिरफ्तारी का डिटेल्ड रिकॉर्ड रखा जाएगा।
- रिपोर्ट में गिरफ्तारी का स्थान, समय, कारण, आरोपी का बयान, बरामद सामान, मेडिकल जाँच रिपोर्ट और दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर शामिल होंगे।
- इससे कोर्ट में सबूत पेश करने में आसानी होगी और झूठे केसों पर रोक लगेगी।
2. तलाशी के लिए 2 गवाह जरूरी
- किसी भी तलाशी अभियान के दौरान दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी अनिवार्य होगी।
- इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी कार्रवाई पर अंकुश लगेगा।
3. परिजनों को तुरंत सूचना
- गिरफ्तार व्यक्ति के परिजनों को तुरंत सूचित किया जाएगा।
- इससे अनावश्यक तनाव और भ्रम की स्थिति कम होगी।
4. बरामद सामान का पूरा ब्यौरा
- गिरफ्तारी के दौरान जब्त किए गए सामान का पूरा विवरण दर्ज करना होगा।
- इससे सबूतों की गुणवत्ता बढ़ेगी और मुकदमे की प्रक्रिया तेज होगी।
नए नियमों का उद्देश्य
- निर्दोषों को गलत झूठे मामलों में फंसने से बचाना।
- पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना।
- अपराधियों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाने में मदद करना।
क्या कहते हैं अधिकारी?
यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा, “इन नए नियमों से पुलिस की कार्यशैली और अधिक पेशेवर होगी। हमारा लक्ष्य है कि कानून का पालन करने वाले नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो, जबकि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।”
अब क्या देखना बाकी है?
यूपी पुलिस का यह आदेश सभी जिलों के एसएसपी को भेजा गया है। अब यह देखना होगा कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का कितनी सख्ती से पालन होता है।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश पुलिस की यह नई पहल कानून-व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर इसे ठीक से लागू किया गया, तो आम नागरिकों को न्याय मिलने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और पुलिस की विश्वसनीयता बढ़ेगी।