
📢 कॉइनबेस डेटा उल्लंघन: 69,000 ग्राहकों की जानकारी लीक, $400 मिलियन की ठगी | भारतीय कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर
नई दिल्ली, 2 जून 2025:
दुनिया की जानी-मानी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कंपनी कॉइनबेस (Coinbase) ने 15 मई को एक बड़े डेटा उल्लंघन (Data Breach) का खुलासा किया। इस साइबर हमले में कंपनी को लगभग 400 मिलियन डॉलर (₹3,300 करोड़) का नुकसान हुआ है और 69,000 से अधिक ग्राहक प्रभावित हुए हैं।
🔍 भारत से जुड़ी हैकिंग की कड़ी
इस हमले के पीछे भारतीय आउटसोर्सिंग यूनिट TaskUs के कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक:
- भारत स्थित कॉल सेंटर कर्मचारियों को रिश्वत देकर गोपनीय ग्राहक जानकारी लीक करवाई गई।
- TaskUs, जो 2017 से कॉइनबेस की ग्राहक सेवा देख रही थी, ने इंदौर में 226 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
- इन कर्मचारियों को 500–700 डॉलर प्रतिमाह वेतन मिलता था, और उन्हें आर्थिक प्रलोभन देकर हैकर्स ने इस्तेमाल किया।
💻 हैकिंग का तरीका: फिशिंग और प्रतिरूपण
Fortune की रिपोर्ट के अनुसार:
- हैकर्स ने कॉइनबेस कर्मचारियों का प्रतिरूपण कर ग्राहकों को धोखा दिया।
- यह चुराई गई जानकारी कंपनी के क्रिप्टो वॉल्ट तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसलिए सीधे ग्राहकों को निशाना बनाया गया।
- ग्राहक स्वयं अपनी क्रिप्टो संपत्ति हैकरों को सौंप बैठे।
💬 विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
क्रिप्टो सिक्योरिटी कंपनी Trazelon के संस्थापक सर्जियो गार्सिया ने कहा:
“आउटसोर्सिंग मॉडल में सबसे कमजोर कड़ी वही कर्मचारी हैं जो कम वेतन पर काम कर रहे हैं और रिश्वत के लिए मजबूर हो सकते हैं।”
🛡️ कॉइनबेस की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
- कंपनी ने TaskUs और अन्य विदेशी एजेंसियों से संबंध समाप्त कर दिए हैं।
- डेटा उल्लंघन की जांच चल रही है और प्रभावित खातों की पहचान की जा रही है।
- कॉइनबेस ने कहा है कि वह प्रभावित ग्राहकों को मुआवजा देने पर विचार कर रही है।
⚠️ उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
इस घटना ने डिजिटल संपत्ति निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। विशेषज्ञों ने क्रिप्टो यूज़र्स को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या लिंक पर भरोसा न करें।
- हमेशा 2FA (Two-Factor Authentication) का उपयोग करें।
- अपने क्रिप्टो वॉलेट की जानकारी कभी साझा न करें।
📌 निष्कर्ष
कॉइनबेस डेटा लीक ने दिखाया है कि साइबर सुरक्षा सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि मानव भरोसे का भी मामला है। यह मामला भारत की बीपीओ इंडस्ट्री, वैश्विक कंपनियों की आउटसोर्सिंग रणनीतियों और क्रिप्टो निवेशकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।