

रिपोर्ट: अजय सक्सेना
बरेली-शहर 9412527799. 9412627799.
स्रोत: डॉ. निरूपमा सिंह (स्त्री रोग विशेषज्ञ, बुलंदशहर)
बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश: दुनिया में सिर्फ 8 बार देखी गई एक अत्यंत दुर्लभ और खतरनाक प्रेग्नेंसी का मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सामने आया है। 30 साल की एक महिला के लीवर में भ्रूण पल रहा था, जिसे मेडिकल भाषा में इंट्राहेपेटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Intrahepatic Ectopic Pregnancy) कहा जाता है। डॉक्टरों का दावा है कि यह भारत का पहला ऐसा केस हो सकता है।
क्या है इंट्राहेपेटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी?

सामान्य गर्भावस्था में भ्रूण गर्भाशय (Uterus) में विकसित होता है, लेकिन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भ्रूण गर्भाशय के बाहर कहीं और (जैसे फैलोपियन ट्यूब, ओवरी या इस केस में लीवर) में प्रत्यारोपित हो जाता है। डॉ. निरूपमा सिंह (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार, यह स्थिति माँ और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा होती है, क्योंकि लीवर में भ्रूण का विकसित होना संभव नहीं होता।
कैसे पता चला यह दुर्लभ मामला?
महिला को लगातार पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। जब सामान्य इलाज से आराम नहीं मिला, तो एमआरआई एब्डोमन कराया गया। जांच में पता चला कि उसके लीवर में 12 हफ्ते का जीवित भ्रूण मौजूद है, जिसकी धड़कनें स्पष्ट थीं।
इस तरह की प्रेग्नेंसी कितनी खतरनाक?

डाक्टर रुचि पुजारा के अनुसार
- 4 हफ्ते के बाद ही गंभीर जटिलताएं (रक्तस्राव, तेज दर्द) शुरू हो जाती हैं।
- भ्रूण जीवित नहीं रह सकता, क्योंकि लीवर में उसका विकास संभव नहीं।
- माँ की जान को खतरा रहता है अगर समय पर इलाज न हो।
इलाज क्या है?
ऐसे मामलों में तुरंत सर्जरी करके भ्रूण को हटाना ही एकमात्र विकल्प है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही अल्ट्रासाउंड कराकर भ्रूण की स्थिति पता कर लेनी चाहिए।
दुनिया में कितने मामले सामने आए हैं?
अब तक दुनियाभर में सिर्फ 8 केस ही रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें चीन, नाइजीरिया और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। बुलंदशहर का यह मामला भारत का पहला और दुनिया का 9वां केस हो सकता है।
निष्कर्ष:
यह घटना गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच की अहमियत को दर्शाती है। अगर किसी महिला को गंभीर पेट दर्द या असामान्य लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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