

रिपोर्ट: अजय सक्सेना
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बरेली, उत्तर प्रदेश: शहर के करीब होने के बावजूद बरेली का कुसुम नगर विकास की बाट जोह रहा है। यहाँ के निवासी पिछले दो दशक से टूटी सड़कों, जलभराव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण दयनीय स्थिति में जीने को मजबूर हैं।
क्या है मुख्य समस्या?

1. 20 साल से टूटी सड़क, नहीं हुआ निर्माण
- कुसुम नगर को डोहरा रोड से जोड़ने वाली 200 मीटर की सड़क बेहद खराब हालत में है।
- गड्ढों और कीचड़ के कारण आवागमन में भारी दिक्कतें होती हैं।
- निवासी सुरेश पाल (एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी) बताते हैं – “हम 20 साल से इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम या ग्राम प्रधान कुछ नहीं कर रहे।”
2. जलभराव से स्वास्थ्य संकट
- जल निकासी व्यवस्था न होने से बारिश का पानी इकट्ठा हो जाता है।
- मच्छरों और दुर्गंध के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
- स्थानीय निवासी हिमांशु मिश्रा कहते हैं – “पानी लगने के कारण घर के बाहर भी बैठना मुश्किल है।”
3. शिकायतों का फर्जी निस्तारण
- निवासियों ने जन सुनवाई पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और स्थानीय नेताओं से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- कई मामलों में शिकायतों को “फर्जी तरीके से निपटा दिया गया”, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।
क्यों हो रही है उपेक्षा?

- कुसुम नगर भोजीपुरा और बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र की सीमा पर स्थित है, जिसके कारण यहाँ के विकास पर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं जाता।
- ग्राम प्रधान और नगर निगम बजट की कमी का बहाना बनाते हैं, जबकि आसपास बिल्डर्स ने आलीशान कोठियाँ बना रखी हैं।
निवासियों की मांग
- तुरंत सड़क मरम्मत और पक्की सड़क निर्माण
- जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए नालियों का निर्माण
- शिकायतों की वास्तविक जाँच और समाधान
कुसुम नगर के लोगों का सवाल है – “क्या शहर के पास रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं का हक नहीं?” अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह समस्या और गहराएगी।