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बरेली कॉलेज वित्तीय संकट: यूजीसी का नोटिस, बैंक खाते फ्रीज और भविष्य पर संकट

बरेली कॉलेज उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा जारी नोटिस और नगर निगम द्वारा बैंक खातों को फ्रीज करने के बाद कॉलेज की स्थिति और चिंताजनक हो गई है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर क्या है पूरा मामला, इसके कारण और भविष्य पर क्या होगा प्रभाव?**


1. यूजीसी ने क्यों जारी किया नोटिस?

2014-15 में बरेली कॉलेज को यूजीसी से 19 लाख रुपये का अनुदान मिला था, जिसका उपयोग शोध कार्य, शैक्षिक संगोष्ठियों और संसाधनों के विकास में किया गया था। लेकिन, यूजीसी का आरोप है कि कॉलेज ने इस राशि का सही हिसाब नहीं दिया

  • यूजीसी ने 2022, 2023 और 2024 में लगातार नोटिस भेजे, लेकिन कॉलेज ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
  • अब यूजीसी ने ब्याज सहित पूरी राशि वापस लौटाने का आदेश दिया है।
  • कॉलेज प्रशासन का दावा है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी गई है और जल्द ही मामला सुलझ जाएगा।

2. नगर निगम ने क्यों फ्रीज किए बैंक खाते?

बरेली कॉलेज पर नगर निगम का 25 करोड़ रुपये से अधिक का कर बकाया है। इस वजह से नगर निगम ने कॉलेज के सभी बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं।

इसके क्या हैं परिणाम?

शोधार्थियों को स्टाइपेंड नहीं मिल पा रहा, जिससे उनके कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कॉलेज का स्विमिंग पूल बंद पड़ा है और अब खंडहर में तब्दील हो रहा है।
नए विकास कार्य और सेमिनार रुक गए हैं।
शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन में भी देरी हो रही है।


3. कॉलेज के भविष्य पर क्या होगा असर?

यदि यह संकट जल्द ही नहीं सुलझा, तो बरेली कॉलेज को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ सकता है:

🔹 यूजीसी से भविष्य में अनुदान मिलने में दिक्कत हो सकती है।
🔹 छात्रों और शोधार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
🔹 कॉलेज की रैंकिंग और प्रतिष्ठा को झटका लग सकता है।


4. क्या है समाधान?

इस समस्या का हल निकालने के लिए कॉलेज प्रशासन को:
यूजीसी को पूरी जानकारी और बकाया राशि जल्द से जल्द चुकानी होगी।
नगर निगम के साथ बातचीत कर कर बकाए का समाधान निकालना होगा।
छात्रों और शिक्षकों को आश्वस्त करना होगा कि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।


निष्कर्ष

बरेली कॉलेज का यह वित्तीय संकट न सिर्फ संस्थान बल्कि छात्रों और शिक्षकों के लिए भी चिंता का विषय है। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इसका दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार मिलकर इस समस्या का समाधान निकालेंगे।