
बरेली, उत्तर प्रदेश | 4 जून 2025
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में किसानों का गुस्सा तेज होता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को बरेली में किसान एकता संघ के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
डॉ. रवि नागर बोले – बिजली निजीकरण जनविरोधी, किसानों पर पड़ रहा है सीधा असर
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता डॉ. रवि नागर ने कहा कि बिजली का निजीकरण सीधे तौर पर गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह निर्णय कॉरपोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया जा रहा है।
उनका कहना था कि बिजली अब जीवन की बुनियादी जरूरत बन चुकी है, और इसका निजीकरण करना आम जनता को महंगी बिजली की ओर धकेलने जैसा है।
सरकार पर चुनावी वादे न निभाने का आरोप
डॉ. नागर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया। इसके विपरीत, किसानों की ट्यूबवेलों पर जबरन इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर कार्रवाई पर नाराज़गी
किसानों ने बिजली विभाग के कर्मचारियों की बर्खास्तगी की भी कड़ी निंदा की। डॉ. नागर ने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध कर रहे कर्मचारियों को बर्खास्त कर उन्हें डराने और दमन करने का काम कर रही है। यह लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों के खिलाफ है।
सात सूत्रीय मांग पत्र में ये प्रमुख मांगे की गईं:
- बिजली का निजीकरण तुरंत रोका जाए।
- बर्खास्त कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए।
- किसानों की ट्यूबवेलों पर मीटर लगाना बंद किया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।
- सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली योजना को लागू किया जाए।
- आंदोलनकारी कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए।
- बिजली से जुड़ी नीतियों पर जनता की सहमति अनिवार्य की जाए।
प्रमुख किसान नेता रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में अनेक किसान नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही। प्रमुख रूप से उपस्थित थे:
- पंडित राजेश शर्मा (प्रदेश अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ)
- डॉ. हरिओम राठौर (प्रदेश महासचिव)
- अमरजीत सिंह (मंडल मीडिया प्रभारी)
- संजय पाठक, गिरीश गोस्वामी, मैनेजर खान, प्रदीप यादव, रंजीत पाल, राजेंद्र तिवारी, धनपाल मौर्य सहित दर्जनों कार्यकर्ता।
आंदोलन की चेतावनी
संयुक्त किसान मोर्चा और किसान एकता संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इन सात सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्य भर में वृहद किसान आंदोलन शुरू किया जाएगा।
🔍 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण को लेकर किसानों का विरोध अब और अधिक व्यापक रूप लेता जा रहा है। सरकार के लिए यह एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। देखना होगा कि सरकार इस पर जनता और किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए क्या कदम उठाती है।