बरेली फीनिक्स मॉल के बाहर बच्चों से भीख मंगवाने का काला धंधा, प्रशासन बेखबर

रिपोर्टिंग: अजय सक्सेना, बरेली
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बरेली – शहर के प्रतिष्ठित फीनिक्स मॉल के बाहर हर शाम एक दर्दनाक और शर्मनाक दृश्य आम हो चला है। यात्री शेड के नीचे एक फोल्डिंग चारपाई पर दो महिलाएं—एक अधेड़ और एक जवान—आराम फरमाती नजर आती हैं, जबकि नन्हे-नन्हे मासूम बच्चे उनके लिए भीख मांगने या गुब्बारे बेचने का काम करते हैं।

प्रतिदिन शाम के समय 4-5 साल की उम्र के 7 से 8 बच्चे इन दोनों महिलाओं को पैसे लाकर देते हैं। एक-एक कर बच्चे आते हैं, कोई कुछ रुपये थमाता है और भाग जाता है। लेकिन जैसे ही कोई बच्चा पैसे नहीं दे पाता, तो उसे बेरहमी से पीटा जाता है। हाल ही में एक बच्चा जब बिना पैसे लाया, तो अधेड़ महिला ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया, जिससे बच्चा रोता हुआ वहां से चला गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह रोज़ाना का सिलसिला है। रात 10 बजे के आसपास एक ऑटो आता है और दोनों महिलाएं बच्चों को लेकर निकल जाती हैं। सवाल ये उठता है कि ये बच्चे कौन हैं? क्या ये महिलाओं के अपने बच्चे हैं? या फिर किसी गिरोह का हिस्सा हैं जो मासूमों से भीख मंगवाने का रैकेट चला रहा है?

सबसे चिंताजनक बात ये है कि ये पूरा दृश्य फीनिक्स मॉल जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में हर रोज होता है, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से मौन है। न कोई पूछताछ, न कोई कार्रवाई।

क्या कहता है कानून?
बाल श्रम और बच्चों से जबरन भीख मंगवाना भारतीय कानून के तहत अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित महिलाओं और पूरे रैकेट पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

जनहित में अपील
बरेली प्रशासन और बाल कल्याण समिति से आग्रह है कि इस मामले का संज्ञान लें, और मासूम बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।


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